
दरअसल हम्मालों को अभी लगभग 5 रुपये प्रति बोरा मजदूरी मिलती है जबकि हम्माल प्रति बोरा 24 रुपये की दर से मजदूरी की मांग पर अड़े हुए हैं जो फिलहाल संभव नहीं है। वहीं किसानों का आरोप है कि हम्माल मजदूरी के अलावा भी अवैध वसूली करते हैं जिससे किसानों को काफी आर्थिक भार झेलना पड़ता है। मंडी में इस गतिरोध को तोड़ने के लिए जिला प्रशासन, मंडी प्रबंधन और व्यापारी हम्मालों से चर्चा करके बीच का रास्ता निकालने में जुटे हुए हैं। फिलहाल इस बात पर सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि हम्मालों को प्रति बोरा मजदूरी अन्य सभी मंडियों के बराबर मिले को साढ़े 6 रुपये से लेकर 9 रुपये प्रति मानक बोरे के हिसाब से दी जाती है। वहीं ये भी शर्त रखी गई है कि हम्माल किसानों से मजदूरी के अतिरिक्त कोई वसूली नहीं करेंगे। फिलहाल मंडी में चर्चा जारी है लेकिन अभी खरीदी बंद रहने से मंडी में व्यवस्था चरमरा गई है।
