दिंगबर जैन मुनि संत परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज ने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में 3दिन के उपवास के बाद अपना शरीर त्याग दिया। संत के शरीर त्यागने का पता चलते ही जैन समाज के लोगों का जुटना शुरू हो गया है। दोपहर एक बजे होगी अंतिम संस्कार विधि।
डोंगरगढ़ (दबंग प्रहरी समाचार )। देश भर के जैन समाज के लिए आज यानि 18 फरवरी का दिन सबसे कठिन है। समाज के वर्तमान के वर्धमान कहे जाने वाले संत आचार्य विद्यासागर महाराज ने समाधि लेते हुए 3 दिन के उपवास के बाद अपना देह त्याग दिया है। शनिवार की देर रात करीब 2:35 बजे उन्होंने अपना देह त्याग दिया। देह त्यागने से पहले उन्होंने अखंड मौन धारण कर लिया था। उनके देह त्यागने का पता चलते ही जैन समाज के लोग जुटने लगे है।

आचार्य ज्ञान सागर के शिष्य आचार्य विद्यासागर ने 72 साल की उम्र में छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में 3 दिनों के उपवास के बाद अपना शरीर त्याग दिया है। रविवार को दोपहर एक बजे उनकी अंतिम संस्कार विधि पूरी की जाएगी। आचार्य के शरीर त्यागने का पता चलते ही दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया है।

आचार्य श्री के जीवन का सफर
जैन संत विद्यासागर महाराज का जन्म देश की आजादी के पहले कर्नाटक के बेलगांव के सदलगा गांव में 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनके 3 भाई और 2 बहनें है। तीन भाई में से 2 जैन मुनि तो तीसरे भाई धर्म के काम में लगे है। उनकी बहनों ने भी ब्रह्मचर्य लिया है। आचार्य विद्यासागर महाराज ने अभी तक 500 से ज्यादा मुनि को दीक्षा दे चुके है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में रहते हुए आचार्य विद्यासागर ने अपनी देह का त्याग किया।