अमेरिका में केवल चल रहा दिखावे का खेल ,लोगों के पास रहने को घर तक नहीं

एक साल में पचास राज्यों में घर का  किराया 24से 28 प्रतिशत  तक बढा

अमेरिका में मकान का किराया आसमान छू रहा है। लोग घर छोड़कर कार में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं। जिम जाने लगे हैं, ताकि नहा सकें। इंटरनेट का खर्चा बचाने वाईफाई के लिए लाइब्रेरी जा रहे हैं। दरअसल, पिछले साल मकान का किराया 24% से 28% तक बढ़ गया है। कैलिफोर्निया के एरिक हैंस्ली ने बताया कि सरकार से सोशल सिक्योरिटी के तहत 1200 डॉलर (96,000 रुपए) महीने मिलते हैं।

खाने के खर्च से बचने के लिए रख रहे व्रत
एक औसत आवासीय एरिया में सस्ता किराए का मकान 1500 डॉलर (1,20,000) तक मिलता है। लिहाजा, लोग अपनी कार में रह रहे हैं। जिम में माहीने का किराया 40-50 डॉलर देकर नहाने की सुविधा उपलब्ध है। लाइब्रेरी की मैंबरशिप इतने खर्च में ही फ्री वाईफाई उपलब्ध करा देती है। केवल खाने पर खर्च होता है, जिसे कम करने के लिए व्रत करने का चलन भी बढ़ा है, क्योंकि यह सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

कार मे सोने वालों को कहते हैं बेघर एलीट
एरिक नाम के शख्स ने बताया कि बोस्टन के परंपरागत उच्च वर्ग के लोग जो हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, उन्हें बोस्टन एलीट के नाम से पुकारा जाता हैं। इसी तर्ज पर बेघर लोग जिनके पास सोने के लिए अपनी कार है, उन्हें बेघर एलीट कहते हैं। एरिक 2009 तक सैन फ्रांसिस्को में छोटे से घर में रहते थे।

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वे मॉर्टगेज कंपनी में काम करते थे, लेकिन नौकरी जाने के बाद EMI के पैसे भी नहीं बचे। वे सैन डियेगो में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगे और किराए के मकान में आ गए। कोविड के दौरान नौकरी खतरे में आ गई।

इन लोगों में शामिल पांच लाख लोग
एरिक ने जरूरी सामान अपनी गाड़ी में लोड किया और वे अब स्टेल्थ कैंपिंग करते हैं। यानी वे अपनी गाड़ी में सोते हैं। मारिया थॉम्पसन एक हाउसिंग अटॉर्नी हैं जो गरीबों का केस लड़ती हैं। उन्होंने बताया कि साल 2020 तक अमेरिका में 70 लाख लोग सस्ते किराए के मकानों में रहते थे। किराए में बढ़त के कारण अब अपनी गाड़ियों में सोने वाले लोगों कि संख्या 5 लाख तक होने की संभावना है।

वे फ्री पब्लिक पार्किंग में गाड़ी पार्क करते हैं। रेसिडेंशियल एरिया में पार्क करना खतरनाक होता है, क्योंकि वे लोग जिनके घर पार्किंग के पास होते है। वे पुलिस बुला लेते हैं।