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आंध्र के गांव में फिर एक बार लॉकडाउन: कारण बुखार के बाद मौत से दहशत

पिशाच के डर से स्कूल-आंगनबाड़ी बंद, रास्तों पर नींबू लगाकर बाड़ बनाई

श्रीकाकुलम । आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले का वेनेलावलसा गांव में पिछले दिनों कुछ लोगों की बुखार आने के बाद मौत हो गई। अब पूरा गांव इस दहशत में है कि ये काम मांस खाने वाले पिशाच का है। उसी पिशाच से छुटकारा पाने गांव में 17 से 25 अप्रैल तक सख्त लॉकडाउन लगा दिया गया है। इतना सख्त जितना कोरोना काल में भी नहीं लगा। इस बीच न तो बाहर रहने वाला कोई गांव में आ सकता था न ही कोई गांव से कोई बाहर जा सकता।

ग्रामीणों का मानना-पिशाच पर असर करेगा लॉकडाउन
यह गांव श्रीकाकुलम जिले के सरुबुज्जिली मंडल के अंतर्गत स्थित है। इसकी बॉर्डर ओडिशा से लगी हुई है। ग्रामीणों का मानना ​​है कि ये लॉकडाउन बुरी आत्माओं के खिलाफ असरदार रहेगा। गांव में सरकारी कार्यालय भी बंद रहा। गांव में कोई एंट्री न कर सके इसके लिए बाड़ लगाई थी। यहां तक ​​कि स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए, क्योंकि कर्मचारियों, मेडिकल स्टाफ और टीचर्स को गांव में आने की परमिशन नहीं थी।

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पुलिस सहित स्थानीय अधिकारियों ने आंगनबाडी, स्कूल और ग्राम सचिवालय को खोलने की अनुमति देने के लिए गांव वालों मनाने के लिए दौरा किया। बातचीत के बाद वे इसके लिए राजी हुए।

पुजारियों ने दी थी सलाह
ग्रामीणों का मानना ​​है कि यह बुरी आत्माओं के कारण हुआ है जो गांव में घूम रही हैं। गांव के बुजुर्गों ने कथित तौर पर ओडिशा और पड़ोसी विजयनगरम जिले के पुजारियों से सलाह ली, जिन्होंने लॉकडाउन का सुझाव दिया। पुजारियों की सलाह के अनुसार, गांव की चारों दिशाओं में नींबू लगाए गए और 17 से 25 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू किया गया।

बाहरी लोगों ने प्रवेश से इनकार किया
गांव की ओर जाने वाली सड़क को भी बंद कर दिया गया था, और एक चेतावनी चस्पा की गई थी कि बाहरी लोगों को गांव में आने की अनुमति नहीं है और गांव में रहने वालों को भी घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। इस घटना से जिले में हड़कंप मच गया। जहां कई लोगों ने इस प्रथा पर सवाल उठाया, वहीं कइयों ने इस पर विश्वास किया।